Thursday, 8 November 2018

Prerna

अरे! ओ जीवन के साधको,
तुम निचली डाल  का फूल तोड कर लौटे जा रहे हो,
यह फूंगनी पर का,
यह लाल लाल आम किसके वास्ते है,

अरे! ओ जीवन के साधको,
अगर किनारे की मरी हुई सीपीयो से ही तुम्हे संतोष हो गया तो,
समुन्द्र के अंतराल मई चुफे हुए,
मोती को कौन बहार लाएगा,

अरे! ओ जीवन के साधको,
दुनिया मै जितने भी मज़े बीख़रे गए है,
उनमे तुम्हारा भी हिस्सा है
 वह चीज़ भी तुम्हारी हो  सकती है,
जिसे तुम अपनी पहुंच के परे लौटे कर चले जा रहे हो.

अरे! ओ जीवन के साधको,
कामना का दामन छोटा मत करो,
ज़िन्दगी के फल को दोनों हाथो से,
दबा का निचोडो,
रस की निझरी,
तुम्हारे बहे भी बह सकती है.

 

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Prerna

अरे! ओ जीवन के साधको, तुम निचली डाल  का फूल तोड कर लौटे जा रहे हो, यह फूंगनी पर का, यह लाल लाल आम किसके वास्ते है, अरे! ओ जीवन के साध...